रास्तों का इल्म ना था या फिर मंजिले दगाबाज निकलीं
मेरी कोशिशों से ज्यादा तेरी साजिशे कामयाब निकलीं
दिल ने फकत इतना ही चाहा रहगुजर कोई साथ हो
हमकदम वो हर कदम पर बेवफा कालाबाज निकली
हर दफा एक नयी इबारत गढ़ने की तासीर की
हर दफा मेरी कहानी बदमजा एक ख्वाब निकली
अपने इरादे और वो सारे वादे बेमानी से हो गए
जब से अपनी जिंदगी औरों की मोहताज निकली
बुतपरस्तों फिर आज तुम्हे वो कौन सा खुदा मिला
जिसकी खातिर आसमां से ऊंची ये आवाज निकली
कि इस दश्त में दीपक कहो अब रोशन किसे करे
अफ़सोस अपनी जिंदगी ही बुझता हुआ चिराग निकली
मेरी कोशिशों से ज्यादा तेरी साजिशे कामयाब निकलीं
दिल ने फकत इतना ही चाहा रहगुजर कोई साथ हो
हमकदम वो हर कदम पर बेवफा कालाबाज निकली
हर दफा एक नयी इबारत गढ़ने की तासीर की
हर दफा मेरी कहानी बदमजा एक ख्वाब निकली
अपने इरादे और वो सारे वादे बेमानी से हो गए
जब से अपनी जिंदगी औरों की मोहताज निकली
बुतपरस्तों फिर आज तुम्हे वो कौन सा खुदा मिला
जिसकी खातिर आसमां से ऊंची ये आवाज निकली
कि इस दश्त में दीपक कहो अब रोशन किसे करे
अफ़सोस अपनी जिंदगी ही बुझता हुआ चिराग निकली
No comments:
Post a Comment