मेरे सब्र को और इन्तहा न दे
जख्म देकर मुझको दवा न दे
शोलो की तपिश से होगा बचना मुश्किल
सोयी हुयी है चिंगारियां हवा न दे
तनहा ही चलूँगा मै जानिबे मंजिल
कि अब मुझे कोई कारवां न दे
एक हंसी की कीमत मै जानता हूँ
यादों के खुशनुमा जहाँ न दे
हर रोज एक नया ख़त लिख कर
गमे जुदाई मुझे बारहा न दे