Thursday, July 28, 2016

जय माता दी!!

जय माता दी!!
माता इतना आशीष माँगू तेरी भक्ति बनी रहे,
सत्कर्मो की राह चलू, बस इतनी बुद्धि बनी रहे |

चाहे भ्रम जगत ये छूटे, तेरा नाम ना छूटे मुख से,
बन्धुत्व और प्रेम सृजित ये तेरी सृष्टि बनी रहे |

जुल्म करे ना जुल्म सहे ऐसी करनी बनी रहे,
तम स्वयं ही खोजे खुद को, ऐसी ज्योति बनी रहे|

तेरी सेवा के रत्नों से माँ भरा हो अपना जीवन 
मिथ्या लालच के सागर से अपनी कश्ती बची रहे|

माँ तूने तो महिषाशुर मारे त्रिलोको का उद्धार किया 
हम खुद के दानव से लड़ पाए इतनी शक्ति बनी रहे|

माँ हम अज्ञानी बालक है, भूल तो हमसे होगी ही,
क्षमा मिले माँ हमको तेरी, करुणादृष्टि बनी रहे |

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