Friday, October 11, 2019

वो चुपके चुपके आती है,
और धीमे से मुस्काती है,
आकर पास वो कानों में,
पुन: आमंत्रण दे जाती है|

लो लेने तुम्हें मैं आई हूँ,
ना समझो पीर पराई हूँ,
ये सारा जीवन मिथ्या है,
इक मैं ही तो सच्चाई हूँ|

यूँ टाला है हर बार उसे,
ये कहकर मैंने प्रियजनो
चल दूँगा मैं संग तुम्हारे,
कुछ पल को और धीर धरो

कुछ पल को और धीर धरो
कि...

कुछ कर्ज अभी भी बाकी है,
कुछ फर्ज अभी भी बाकी है,
अपनों की चाह से बिंधा हुआ,
कुछ गर्ज अभी भी बाकी है|

Monday, August 15, 2016

कुछ वक्त बेकदर था कुछ तुम भी बेखबर थे

कुछ वक्त बेकदर था कुछ तुम भी बेखबर थे
हमने भी बहुत चाहा पर होंठ सिल गए थे

जलते है सोचकर उन शख्सों की खुशनसीबी
जिन्हें तेरी सोहबत के कुछ पल मयस्सर थे

जमाने ने हमको दीवाना भी कह दिया
कुछ तुममे उलझे हमी इसकदर थे

तेरी सगाई की खबर जो हमतक पहुंची
नयनों से बहते बस आंसुओं के सागर थे

आता है याद अब भी गुजरा हुआ ज़माना
सोचते है हम भी आखिर  कितने बेअसर थे

मन में प्यार का दीप जला बैठे हैं

मन में प्यार का दीप जला बैठे हैं
हार कर दिल से दिल गवां बैठे है

बीत गए लम्हे मेरे इंतजार के
रखे हुए सारे अरमान लुटा बैठे है

निगाहों में शायद बस गया है कोई
भान है हमें किससे दिल लगा बैठे है

यादों में शायद मेरी बस गया है कोई
रस्तों पे उनके लिए पलके बिछा बैठे है

कह देना ऐ हवाओं जाकर उनसे
रब दी सौ हम प्यार जता बैठे है

ताउम्र हम जलते रहेंगे उनके प्यार में
है खबर हम किससे दिल लगा बैठे है 

खुद अपनी हसरतों से गाफिल था मै

खुद अपनी हसरतों से गाफिल था मै
खुद अपनी जीस्त का कातिल था मै

मौसमें-गुल की खुमारी थी हरसूं
बस एक गुल का ही साइल था मै

थे इरादे बहुत नेक मगर क्या करूं
खुद से ही बेवफाई का शाहिद था मै

 दामन  में जिसके कभी हलचल ना हुई
 एक ऐसा बदनसीब वो साहिल था मै

अच्छा है आज तेरा भी साथ छूटा
कब किसके प्यार के काबिल था मै 
यूँ सजधज के तेरा आना नजरों से कहर ढाना
मेरे दिल को भा गया है तेरा ऐसे मुस्कुराना