मेरी तकदीर मै तुझको फिर से आजमाऊंगा
बात मेरे हक़ की है यूं लौट कर ना जाऊँगा
तेरे जिम्मे यहाँ साजिशों की फौज सही
मै हौसलों की फिर नयी मशाल जलाऊंगा
यूँ ही सुपर्दे ख़ाक कर दे तेरी वो औकात नहीं
अभी मेरे परवाज देख मै आसमां तक जाऊँगा
तेरे दामन में मेरे वास्ते चाहे ठोकरे ही सही
इन पत्थरों से मै अपना ताजमहल बनाऊंगा
अब तेरे अंधेरो की परवाह नहीं रही मुझे
खुद दीपक हूँ जल कर भी सदा मुस्कुराऊंगा
बात मेरे हक़ की है यूं लौट कर ना जाऊँगा
तेरे जिम्मे यहाँ साजिशों की फौज सही
मै हौसलों की फिर नयी मशाल जलाऊंगा
यूँ ही सुपर्दे ख़ाक कर दे तेरी वो औकात नहीं
अभी मेरे परवाज देख मै आसमां तक जाऊँगा
तेरे दामन में मेरे वास्ते चाहे ठोकरे ही सही
इन पत्थरों से मै अपना ताजमहल बनाऊंगा
अब तेरे अंधेरो की परवाह नहीं रही मुझे
खुद दीपक हूँ जल कर भी सदा मुस्कुराऊंगा
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