माना हमने जिंदगी भी अपना हक़ तो निभायेगी
गर चोटें इसने दी है तो खुशियाँ भी देकर जायेगी
ख्वाहिशें होंगी दर्द भी होगा कभी कभी अवसाद भी
लेकिन फिर कहीं अरमानो के सपने नए जगाएगी
हर पल में एक रूप नया छलिया सी तो फितरत है
कहीं कड़ी धुप में मारेगी तो कहीं सावन बरसायेगी
अब लगता है कि रो देंगे तो दूजे पल में हँसते है
कभी कई रातो का जागना, कभी लोरियां गायेगी
माना ये संघर्ष विकट है जीवन हर पल छूट रहा
पर यारों कभी अपनी भी कोई सुबह तो आएगी
गर चोटें इसने दी है तो खुशियाँ भी देकर जायेगी
ख्वाहिशें होंगी दर्द भी होगा कभी कभी अवसाद भी
लेकिन फिर कहीं अरमानो के सपने नए जगाएगी
हर पल में एक रूप नया छलिया सी तो फितरत है
कहीं कड़ी धुप में मारेगी तो कहीं सावन बरसायेगी
अब लगता है कि रो देंगे तो दूजे पल में हँसते है
कभी कई रातो का जागना, कभी लोरियां गायेगी
माना ये संघर्ष विकट है जीवन हर पल छूट रहा
पर यारों कभी अपनी भी कोई सुबह तो आएगी
No comments:
Post a Comment