मेरी पहली हास्य
व्यंग्य कविता .............................
मै अपनी दास्तान सुना रहा हूँ
बस इस ख्याल से,
कि, कम से कम
आपको तो रहम आवे
मेरे इस हाल पे
बात दरअसल यह है कि ...
मै शुरू से ही भेजे से कमजोर हूँ
बाखुदा,
बचपन से पढाईचोर हूँ |
बात तब की है ..........
जब मेरा नाम नर्सरी में लिखवाया गया
और,
जबरन मेरा नाम स्कूल में डाला गया |
स्कूल का नाम सुनते ही मै रोने बैठ जाता
या फिर
मुझे बुखार है कहकर सोने चला जाता |
कभी मुझे चोकलेटों से बहलाया जाता
तो
कभी पिटाई से समझाया जाता
पर जाने किस मिट्टी का बना हूँ
स्कूल जाना मुझे कभी रास नहीं आया
जिस दिन मन से पढाई की हो
ऐसा दिन कोई खास नहीं आया
हालात यहाँ तक पहुंचे कि
जब मै पांचवीं में पढता था
तभी से दिन दिन भर
स्कूल से गायब रहता था
मेरे सामान्य ज्ञान का तो यह हाल था
कि एक बार टीचर ने पुछा
बताओ,” गंगा कहाँ से कहाँ तक बहती है ?”
तो मैंने हँसते हुए कहा ,
“ जी वो भी कही बहती है
वो तो मेरे परोस में रहती है
और
सही सलामत अपने दोनों पैरों पर चलती है |
हिन्दी का हस्तलेख तो मै ऐसा लिखा करता था
कि
दोबारा उसे खुद भी नहीं पढ़ सकता था
बस एक इंग्लिश मुझे
अच्छी तरह समझ में आती थी
क्योंकि मैडम अक्सर पढाई की जगह
घर के ही किस्से सुनाती थी
और 55 बरस की होने के बावजूद
खुद को हमारी दीदी ही बताती थी
खैर इसी तरह परीक्षा में फ़ैल होते होते
और एग्जामिनेशन हॉल में
पूरे समय सोते सोते
किसी तरह घूस देकर
मैंने पास कर लिया मेट्रिक
ये बात अलग है कि
उसमे भी मैंने लगायी थी हेट्रिक|
मेरा छोटा सा दिल झूम उठा
कि चलो अब तो
पढाई से पिंड छूटा
पर जाने मेरे माता पिता को मुझसे किस बात की दुश्मनी थी
जो उन्हें मुझे पढ़ा लिखा कर कुछ बनाने की धुन चढ़ी थी
उन्होंने मेरी खुशियाँ जो बचपन में मर गयी थी
उन्हें एक बार फिर से मरवा दिया
और
मेरा दाखिला इंटर में करवा दिया
साथ ही साथ चार चार प्रोफेसरों को
मुझे पढ़ाने के लिए लगवा दिया
पर मै भी कहाँ पीछे रहने वाला था
कसम खायी थी
पढाई तो नहीं करने वाला था
मैंने कुछ ऐसे हथकंडे इस्तेमाल किए
कि
एक हफ्ते में ही उन प्रोफेसरों ने
अपने बसते सम्भाल लिए
लगातार चार सालों से
इंटर में माथा खपा रहा हूँ
और हर बार पीछे से
अव्वल आ रहा हूँ|
अब आप ही मेरी इस समस्या को समझिये
और मेरे पिता से जाकर कहिये
कि
मेरी और पढाई की शुरू से ही
दुश्मनी है
हम दोनों में बचपन से ही
ठनी है
मै पढाई का अब और नहीं कर सकता सामना
जल्द ही पढाई से पिंड छूटे
यही है मेरी कामना
परन्तु दोस्तों
जो बात मै आपसे कहना चाहता हूँ
शिक्षा की महत्ता आपको समझाना चाहता हूँ
शिक्षा ही जीवन है इस तथ्य को समझिये
और
जो भूल मैंने की है
वो आप मत कीजिये|
मै अपनी दास्तान सुना रहा हूँ
बस इस ख्याल से,
कि, कम से कम
आपको तो रहम आवे
मेरे इस हाल पे
बात दरअसल यह है कि ...
मै शुरू से ही भेजे से कमजोर हूँ
बाखुदा,
बचपन से पढाईचोर हूँ |
बात तब की है ..........
जब मेरा नाम नर्सरी में लिखवाया गया
और,
जबरन मेरा नाम स्कूल में डाला गया |
स्कूल का नाम सुनते ही मै रोने बैठ जाता
या फिर
मुझे बुखार है कहकर सोने चला जाता |
कभी मुझे चोकलेटों से बहलाया जाता
तो
कभी पिटाई से समझाया जाता
पर जाने किस मिट्टी का बना हूँ
स्कूल जाना मुझे कभी रास नहीं आया
जिस दिन मन से पढाई की हो
ऐसा दिन कोई खास नहीं आया
हालात यहाँ तक पहुंचे कि
जब मै पांचवीं में पढता था
तभी से दिन दिन भर
स्कूल से गायब रहता था
मेरे सामान्य ज्ञान का तो यह हाल था
कि एक बार टीचर ने पुछा
बताओ,” गंगा कहाँ से कहाँ तक बहती है ?”
तो मैंने हँसते हुए कहा ,
“ जी वो भी कही बहती है
वो तो मेरे परोस में रहती है
और
सही सलामत अपने दोनों पैरों पर चलती है |
हिन्दी का हस्तलेख तो मै ऐसा लिखा करता था
कि
दोबारा उसे खुद भी नहीं पढ़ सकता था
बस एक इंग्लिश मुझे
अच्छी तरह समझ में आती थी
क्योंकि मैडम अक्सर पढाई की जगह
घर के ही किस्से सुनाती थी
और 55 बरस की होने के बावजूद
खुद को हमारी दीदी ही बताती थी
खैर इसी तरह परीक्षा में फ़ैल होते होते
और एग्जामिनेशन हॉल में
पूरे समय सोते सोते
किसी तरह घूस देकर
मैंने पास कर लिया मेट्रिक
ये बात अलग है कि
उसमे भी मैंने लगायी थी हेट्रिक|
मेरा छोटा सा दिल झूम उठा
कि चलो अब तो
पढाई से पिंड छूटा
पर जाने मेरे माता पिता को मुझसे किस बात की दुश्मनी थी
जो उन्हें मुझे पढ़ा लिखा कर कुछ बनाने की धुन चढ़ी थी
उन्होंने मेरी खुशियाँ जो बचपन में मर गयी थी
उन्हें एक बार फिर से मरवा दिया
और
मेरा दाखिला इंटर में करवा दिया
साथ ही साथ चार चार प्रोफेसरों को
मुझे पढ़ाने के लिए लगवा दिया
पर मै भी कहाँ पीछे रहने वाला था
कसम खायी थी
पढाई तो नहीं करने वाला था
मैंने कुछ ऐसे हथकंडे इस्तेमाल किए
कि
एक हफ्ते में ही उन प्रोफेसरों ने
अपने बसते सम्भाल लिए
लगातार चार सालों से
इंटर में माथा खपा रहा हूँ
और हर बार पीछे से
अव्वल आ रहा हूँ|
अब आप ही मेरी इस समस्या को समझिये
और मेरे पिता से जाकर कहिये
कि
मेरी और पढाई की शुरू से ही
दुश्मनी है
हम दोनों में बचपन से ही
ठनी है
मै पढाई का अब और नहीं कर सकता सामना
जल्द ही पढाई से पिंड छूटे
यही है मेरी कामना
परन्तु दोस्तों
जो बात मै आपसे कहना चाहता हूँ
शिक्षा की महत्ता आपको समझाना चाहता हूँ
शिक्षा ही जीवन है इस तथ्य को समझिये
और
जो भूल मैंने की है
वो आप मत कीजिये|
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