कभी वो मेरा हमदम मेरा हमराज हुआ करता था
जिसकी वफाओं पे मुझे नाज हुआ करता था
बेरहम वक्त ने जाने उसे कैसे बदल डाला
जो मेरी हर गजल का साज हुआ करता था
जिसकी वफाओं पे मुझे नाज हुआ करता था
बेरहम वक्त ने जाने उसे कैसे बदल डाला
जो मेरी हर गजल का साज हुआ करता था
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