हूँ तो दीपक ही मै जलता चला जाऊंगा
जमाने को रोशन करता चला जाऊँगा
हवा आज जितनी भी आजमाइश ले ले
दरिया-ए-फिज़ा में बहता चला जाऊँगा
जो सितमगरों के गर सितम साथ होंगे
हमदर्दों की दुआ भी साथ लिए जाऊँगा
अपनी फितरत पे होता है सबको गुमाँ
वक्ते-रुखसत में हर पल मुस्कुराऊंगा
खुद के मिट जाने का मुझको क्यों गम हो
तारीकियों में मै ही याद किया जाऊँगा
जमाने को रोशन करता चला जाऊँगा
हवा आज जितनी भी आजमाइश ले ले
दरिया-ए-फिज़ा में बहता चला जाऊँगा
जो सितमगरों के गर सितम साथ होंगे
हमदर्दों की दुआ भी साथ लिए जाऊँगा
अपनी फितरत पे होता है सबको गुमाँ
वक्ते-रुखसत में हर पल मुस्कुराऊंगा
खुद के मिट जाने का मुझको क्यों गम हो
तारीकियों में मै ही याद किया जाऊँगा
No comments:
Post a Comment