Monday, August 15, 2016

खुद अपनी हसरतों से गाफिल था मै

खुद अपनी हसरतों से गाफिल था मै
खुद अपनी जीस्त का कातिल था मै

मौसमें-गुल की खुमारी थी हरसूं
बस एक गुल का ही साइल था मै

थे इरादे बहुत नेक मगर क्या करूं
खुद से ही बेवफाई का शाहिद था मै

 दामन  में जिसके कभी हलचल ना हुई
 एक ऐसा बदनसीब वो साहिल था मै

अच्छा है आज तेरा भी साथ छूटा
कब किसके प्यार के काबिल था मै 

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