खुद अपनी हसरतों से गाफिल था मै
खुद अपनी जीस्त का कातिल था मै
मौसमें-गुल की खुमारी थी हरसूं
बस एक गुल का ही साइल था मै
थे इरादे बहुत नेक मगर क्या करूं
खुद से ही बेवफाई का शाहिद था मै
दामन में जिसके कभी हलचल ना हुई
एक ऐसा बदनसीब वो साहिल था मै
अच्छा है आज तेरा भी साथ छूटा
कब किसके प्यार के काबिल था मै
खुद अपनी जीस्त का कातिल था मै
मौसमें-गुल की खुमारी थी हरसूं
बस एक गुल का ही साइल था मै
थे इरादे बहुत नेक मगर क्या करूं
खुद से ही बेवफाई का शाहिद था मै
दामन में जिसके कभी हलचल ना हुई
एक ऐसा बदनसीब वो साहिल था मै
अच्छा है आज तेरा भी साथ छूटा
कब किसके प्यार के काबिल था मै
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