Friday, August 5, 2016

शुभ प्रभात

जब प्रभात की पहली किरण तेरे चेहरे पे मुस्काये
हवा के हलके झोकें तेरी जुल्फों पे बल खाए

पुष्प सभी  उपवन के तेरी साँसों को महकाए
और सुबह की शीतलता तेरे मुखरे पे इतराए

दूर कहीं मंदिर की घंटी तेरे कानो में रस घोले
और तेरे सपनों की दुनिया भी उसके पीछे हो ले

एक चुभन हो मीठी सी और और थोरा मन भरमाये
शुभ प्रभात इसे मेरा समझना और क्या बतलाये 

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