शरीफों ने अब शराफत छोड़ दी है
बस्तों के बोझ से झुके है कंधे
बच्चों ने करनी शरारत छोड़ दी है
भूखे पेट आखिर कब तलक लड़ते
बागियों ने अब बगावत छोड़ दी है
रो रो कर हिज्र में जिन्दा लाश बन गए
अहले दिलों ने अब हिमाकत छोड़ दी है
कि है पतझर शाखें तो वीरां होंगी ही
शज़र ने भी करनी हिफाजत छोड़ दी है
वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा
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