किसी मनचले शायर का ख्वाब हो तुम
सुबह का खिलता गुलाब हो तुम
हो चाहत से भरी सतरंगी चांदनी
या प्यार की रौशनी का आफ़ताब हो तुम
चेहरे से निगाहों को हटना गंवारा नहीं
यौवन की वो छलकती कायनात हो तुम
कि जिससे सजती है वादियों कि सरगम
फिजाओं कि दिलकश वो बहार हो तुम
हो हकीकत में भी तुम कही या फिर
दीपक के बस ख़यालात हो तुम
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