मेरे सब्र को और इन्तहा न दे
जख्म देकर मुझको दवा न दे
शोलो की तपिश से होगा बचना मुश्किल
सोयी हुयी है चिंगारियां हवा न दे
तनहा ही चलूँगा मै जानिबे मंजिल
कि अब मुझे कोई कारवां न दे
एक हंसी की कीमत मै जानता हूँ
यादों के खुशनुमा जहाँ न दे
हर रोज एक नया ख़त लिख कर
गमे जुदाई मुझे बारहा न दे
दीपक, हिंदी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है... लिखते रहें
ReplyDeleteबहुत सुन्दर....
ReplyDeleteहिंदी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है
ReplyDeleteअच्छी कोशिश.
ReplyDeleteमेरी तरह!
हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त करने का कष्ट करें
ब्लाग जगत मे आपका स्वागत है
ReplyDeleteएक हंसी की कीमत मै जानता हूँ
यादों के खुशनुमा जहाँ न दे
बहुत अच्छा है
लगे रहो